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अहिल्याबाई होल्कर और गौमाता की अनसुनी कहानी।

गौमाता साक्षात दया और ममता की प्रतिमूर्ति है ।सनातन धर्म में गाय को पशु नहीं माता का दर्जा दिया गया है और उसे हिंदू जन गौमाता भी कहते हैं। गाय की ममता दया के उदाहरण हमारे इतिहास में भरे पड़े हैं ।उनके उदाहरणों की कमी नहीं है पर हम उनमें से एक प्रसिद्ध कहानी प्रस्तुत करना चाह रहे हैं । मालवा की महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर को कौन नहीं जानता?वह न्याय प्रिय महारानी थी। उन्हें बचपन से ही गाय माता से बहुत प्रेम था ।उन्हें गाय चराने का भी बहुत शौक था वह प्रतिदिन गाय माता को खूब लाड़ दुलार किया करती थी और उन्हें चराने जंगल ले जाती । उनकी सब व्यवस्था देखती थी। उनका ध्यान  इस ओर ही रहता था कि जल की ध्वनि किस ओर से आ रही है और अच्छी घास कहां है। जहां गाय अच्छा पानी पी और घास खा सकें। वे गाय के बछड़ों को गाय से अलग नहीं रखती थी। उनका मानना था कि गाय के बछड़े को गाय से अलग करना ठीक नहीं है। और इसीलिए वे उनके बच्चों को भी साथ ले जाती थी। जब बछड़े गाय का दूध पीते जाते थे  गौ माता को कष्ट होने लगता था तब अहिल्याबाई  बछड़ों को डांट लगाती थी कि अब माता को कष्ट हो रहा है तब वह ...